कथा में रूक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया
आजमगढ: श्रीकृष्ण गौशाला समिति के शताब्दी वर्ष पर नारायण सेवा संस्थान के सहायतार्थ आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास राधा किशोरी ने अमृत वर्षा करते हुए ठाकुर जी की महारास लीला, कंस वध, उद्धव-गोपी संवाद एवं रूक्मणी विवाह प्रसंग से श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के मध्य में गीत संगीत व भजन से श्रोतागण झुमने, नाचने एवं कृष्ण भक्ति में लीन नजर आये। कथा में रूक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। रूकमणी जी की झांकी देखकर कथा में बैठे भक्त इस अलौकिक दृश्य को देख धन्य हो गए। श्रीकृष्ण-रूक्मणी की वरमाला पर जमकर फूलो की बरसात हुई। जयकारों से पूरा सत्संग हॉल गूंज उठा। छठवें दिन की शुरूआत कार्यक्रम संयोजक अभिषेक जायसवाल दीनू, भोलानाथ जालान, मनोज खेतान, विरेन्द्र आदि ने भागवत आरती से किया। व्यास राधा किशोरी ने कहा कि जग के कल्याण के लिए सनातन धर्म आधार स्तंभ है, भागवत सनातन धर्म का आधार है। कथा सुनने से मन शुद्ध होता है और मन पवित्र तो चरित्र, जीवन भी पवित्र होता है। कथावाचक ने कहा कि आज हमें मन में बैठे कंस को मारने की जरूरत है। मनुष्य यदि कामना रूपी नाग को वश में कर ले तो जीवन धन्य हो जाएगा। महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आहवान किया और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। प्रभु की प्रत्येक लीला रास है। महारास का सुन्दर वर्णन करते हुए कहा कि जो भक्ति का रसपान करता है। वही जीव गोपी है। भगवान उन्हीं के साथ रासलीला करते है जो उनकी भक्ति रस में आकण्ठ डुबा हो। रासलीला तो भक्त और भगवान के एक रूप होने की लीला है। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया। कथा व्यास राधा किशोरी ने लक्ष्मी रूप माता रूकमणी-श्री केशव के विवाह की कथा का वृतांत भक्तों को सुनाया। कृष्ण रुकमणी विवाह का अद्भुत प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं का रोम-रोम हर्ष से खिल उठा। कहा कि भगवान इतने दयालु है कि अपने भक्त का जरा सा भी कष्ट सहन नहीं कर पाते वे तुरंत उसकी सहायता के लिए दौड़ पड़ंते है। कथा स्थल पर रूक्मणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। भागवत कथा में कृष्ण-रुक्मणी विवाहोत्सव मनाया गया। जैसे रूकमणी जी कथा मंच के सामने बने मंच पर सखियों सहित प्रकट हुईं तो सत्संग हॉल भाव विहल हो उठा। कथा में भजन गाने पर पूरे सत्संग हॉल का मौहाल बदल गया और सभी भक्त झूम उठें, भक्तो को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मानों सब खुद से दूर होकर प्रभु में लीन हो गये हो। इस दौरान मन मोहक झांकियों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया । अंत में आरती, प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया। कथा में अशोक रूंगटा, अजय अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, कृष्ण मुरारी डालमिया, बाबी अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, चन्दन अग्रवाल, सुबाष सोनकर, जयप्रकाश यादव, वीके अग्रवाल, अमिता अग्रवाल आदि सहित भारी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
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